चुनाव आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। यहां 9 अप्रैल को सभी 140 पर मतदान होगा। चुनाव के नतीजे 4 मई को जारी किए जाएंगे। यहां मतदान में लगभग एक महीने का समय है और नतीजों का ऐलान 50 दिन बाद होगा। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि नई सरकार का गठन लगभग दो महीने बाद होगा। केरल में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली मौजूदा वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार का कार्यकाल 23 मई 2026 तक है। ऐसे में नई सरकार का गठन इससे पहले ही हो जाएगा। चुनाव से पहले किए गए MATRIZE-IANS ओपनियन पोल में यहां UDF और LDF के बीच कांटे की टक्कर रहने की संभावना जताई गई है।
केरल में वामपंथी दल सीपीआईएम सत्ता में है। 2021 में हुए चुनाव में इस दल को 62 सीटें मिली थीं। एलडीएफ के अन्य सहयोगियों की मदद से सीपीआईएम ने सरकार बनाई और विजयन मुख्यमंत्री बने। 17 सीट जीतने वाली सीपीआई ने भी उनका समर्थन किया था। इसके अलावा एलडीएफ और केरल कांग्रेस को 5-5 सीटें मिली थीं। जनता दल सेक्युलर और एनसीपी ने भी 2-2 सीटें जीती थीं। इसके अलावा भी 6 स्थानीय दल इस गठबंधन में शामिल हैं, जिन्हें एक-एक सीट मिली थी।
MATRIZE-IANS ओपनियन पोल में वामपंथी दलों के गठबंधन एलडीएफ को 61 से 71 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। केरल में सरकार बनाने के लिए कम से कम 71 सीटें जीतना जरूरी है। वहीं, यूडीएफ को 58 से 69 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी की अगुआई वाले गठबंधन को अधिकतम दो सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में साफ है कि केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कांटे की टक्कर रह सकती है। अगर कांग्रेस की अगुआई वाला यूडीएफ अच्छा प्रदर्शन करता है तो पार्टी यहां सत्ता में आ सकती है। वहीं, बीजेपी के लिए यहां अपना वोट बैंक बनाना जरूरी है। अगर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवार अन्य उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर भी देते हैं तो यह पार्ट के लिए अच्छी खबर मानी जाएगी।
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